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चीन में कोरोना वायरस के मरीजों को खाने में क्यों दिया जा रहा है कछुए का मांस?

चीन में कोरोना वायरस के मरीजों को खाने में क्यों दिया जा रहा है कछुए का मांस?
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कोरोना वायरस के फैलने की रफ्तार बढ़ती ही जा रही है. शुरुआत में नोवेल कोरोना वायरस जानवरों से कुछ इंसानों तक फैला. अब ये मुख्य रूप से इंसानों से ही इंसानो के बीच फैल रहा है. इंसानों में भी मुख्य रूप से लोगों की सांस के संपर्क में आने से. छींकने से. खांसने से.

चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने बताया कि कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 7 फरवरी को 722 हो गई. कुल 34,546 लोग इससे संक्रमित हुए हैं. राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने बताया कि चीन में इस वायरल के कारण 7 फरवरी को 86 लोगों की मौत हो गई. इनमें से 81 लोगों की मौत हुबेई प्रांत और उसकी प्रांतीय राजधानी वुहान में हुई.

इस बीच खबर आ रही है कि चीन में कोरोना वायरस के मरीजों को खाने में कछुए का मांस दिया जा रहा है. वुहान जहां से कोरोना वायरस फैलना शुरू हुआ था. यहां मरीजों को इससे लड़ने के लिए खाने में कछुए का मांस दिया जा रहा है. हालांकि वुहान के अस्‍पतालों के इस फैसले पर विशेषज्ञ गंभीर सवाल उठा रहे हैं.

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वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि कोरोना वायरस के मरीजों को कछुए का मांस खाने को दिया गया. (फोटो-डेली मेल)

डेलीमेल की र‍िपोर्ट के मुताबिक हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान के अस्‍पतालों में अलग-थलग रखे गए मरीजों को रात के खाने में कछुए का मांस परोसा जा रहा है. चीनी मीडिया में जारी एक विडियो में एक व्‍यक्ति ने दावा किया, ‘आज के खाने में नरम कवच वाले कछुए का मांस भी दिया गया.‘ चीन के परंपरागत चिकित्‍सा विज्ञान में कछुए के मांस को पोषक तत्‍वों से भरा माना जाता है.

चीनी मीडिया में कछुए के सूप वाला यह विडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसे कोरोना वायरस से निपटने के लिए बनाए गए अस्‍थायी अस्‍पताल में शूट किया गया है.

30-31 जनवरी की दरमियानी रात WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है. तमाम देश इसे अपने नागरिकों तक पहुंचने से रोकने में लगे हुए हैं. कई देशों ने चीनी नागरिकों की एंट्री पर रोक लगा दी है. कोरोना वायरस की वैक्सीन बनने में महीने भर से ज़्यादा का वक्त लग सकता है. इसलिए तब तक सावधानी बरतना ही बेस्ट है. अगर किसी में ज़ुकाम या निमोनिया जैसे लक्षण नज़र आते हैं, तो चेकअप कराने में बिलकुल न हिचकिचाएं. और आपके आसपास कोई चीन से लौटकर आया है, तो बिना किसी लक्षण के भी चेकअप करा सकते हैं. अंग्रज़ी में कहावत है – प्रिवेंशन इज़ बेटर देन क्योर.

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