‘कनेक्टिंग इंडिया’ वाले संस्थान से इकट्ठे 93 हज़ार कर्मचारी दूर क्यों हो लिए?

किसी सरकारी संस्थान के आधे से ज़्यादा कर्मचारी एकसाथ रिटायर हो जाएं, हैरानी की बात है. देश में ऐसा पहली बार हुआ है. संस्थान है BSNL (Bharat Sanchar Nigam Limited) और MTNL (Mahanagar Telephone Nigam Limited). इन्हें केंद्र सरकार ने VRS (Voluntary Retirement Scheme) ऑफर की थी, तो आधे से ज़्यादा कर्मचारियों ने VRS ले लिया.

# क्यों हुआ

सरकार घाटे में चल रहे BSNL और MTNL पर होने वाला ख़र्च कम से कम करना चाहती है. साथ ही इनकी ज़मीनों और दफ्तरों को किराए पर चढ़ाकर मुनाफ़ा कमाना चाहती है. इसीलिए कर्मचारियों को VRS का ऑप्शन दिया गया. BSNL में कुल 1 लाख 53 हज़ार कर्मचारी हैं और उनमें से 78,569 ने VRS ले लिया है. BSNL और MTNL अब ऐसे सरकारी दफ़्तर बन गए हैं, जहां सरकारी नौकरी के लिए नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के लिए होड़ मची है. MTNL के 18,000 कर्मचारियों में से 80 प्रतिशत लोगों ने VRS ले लिया.

# क्या शर्त थी VRS की

चार नवंबर, 2019 को VRS स्कीम आई थी. भरने की आख़िरी तारीख़ थी 31 जनवरी, 2020. इसी बीच कर्मचारियों को तय करना था कि वो VRS लेंगे या नहीं. जो भी कर्मचारी 50 साल के ज़्यादा की उम्र का थे, VRS के लिए अप्लाई कर सकते थे.

अब जब आधे से ज़्यादा लोगों ने अपनी मर्ज़ी से रिटायरमेंट ले लिया, तो दूरसंचार विभाग इसे अपनी कामयाबी बता रहा है. इसके पीछे असल में VRS की वो शर्त है, जिसे कर्मचारी अपना बड़ा नुकसान नहीं मान रहे. जिन्होंने VRS ले लिया है, उन्हें उनकी तनख्वाह के लगभग बराबर रक़म एकसाथ मिल जाएगी. VRS की शर्त है कि सर्विस के बचे हुए वर्षों में हर महीने के 25 दिनों की तनख्वाह जोड़कर एकसाथ दे दी जाएगी.

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ये दो किश्तों में मिलेगी. आधा पैसा इस साल मिलेगा और आधा पैसा मिलेगा अगले साल. ऐसा विभाग ने वादा किया है. हालांकि BSNL के कर्मचारियों को पिछले कई महीनों से सैलरी भी नहीं मिली है.

एक शर्त ये भी है कि अगर VRS लेने के बाद कर्मचारी की मृत्यु हो गई, तो उसके परिवार को ये पैसा नहीं दिया जाएगा.

# अब क्या होगा

वही होगा, जो सरकार को मंजूर होगा. BSNL और MTNL के बड़े-बड़े दफ़्तर हैं. ज़मीनें हैं. वो सब बेची जाएंगी. किराए पर दी जाएंगी. BSNL के पास 20,000 करोड़ के तो सिर्फ़ टावर और तार वगैरह हैं. BSNL ने DIPAM (Department of Investment and Public Asset Management) से बात चलाई भी है ये सब बेचने के लिए. BSNL इन्हीं सब के भरोसे है. VRS वगैरह निपटाने के लिए सरकार ने 2020-21 के बजट में 37,268 करोड़ रुपए दिए गए हैं.

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