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Sunday, February 5, 2023

स्त्री शक्ति वह परम् शक्ति है जो राष्ट्र के उन्नति की कारण होती है-प्रो0 रीना पाठक

भारत

डॉ. एसके सिंह
डॉ. एसके सिंह
Dr. SK Singh is a senior journalist, he has also worked for Dainik Jagran and Amar Ujala's newspapers.

बस्ती।प्रेम, दया, करुणा व ममता के साथ नारी में अविश्वसनीय सहनशीलता होती है जो सम्पूर्ण विश्व को अपने सेवा भाव से जीतने की शक्ति रखती है। यह कहना है प्रो रीना पाठक प्राचार्य शिवहर्ष किसान पी जी कालेज बस्ती का। वे आर्य समाज नई बाजार बस्ती के 49वें वार्षिकोत्सव में आयोजित महिला जागृति सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि महिलाओं व बालिकाओं को सम्बोधित कर रही थीं। इससे पूर्व आर्य समाज की सदस्या अनीशा मिश्रा द्वारा अंग वस्त्र पहनाकर व ओम चित्र भेंटकर उनका सम्मान किया गया।
प्रधान ओम प्रकाश आर्य ने इस अवसर पर उपस्थित शिवेन्द्र मोहन पाण्डेय किसान पी जी कालेज व समाजसेवी पवन तुलस्यान को अंगवस्त्र पहनाकर व ओम का चित्र भेंटकर उनका सम्मान किया। नन्दिनी व आयुषी आर्य ने गीत प्रस्तुत कर बहनों को अपने प्राचीन गौरव का स्मरण कराया। मुख्य अतिथि ने कहा बहन बेटी के स्वरूप को हमें पत्नी बनने के बाद भी बनाये रखने से हम दो कुलों को समृद्द कर सकती हैं। राष्ट्र गौरव बनाये रखने के लिए संगठित होकर अपने दैवीय स्वरूप को महसूस कर उसके अनुरूप कार्य करने की जरूरत है तभी हम अपने प्राचीन गौरव को प्राप्त कर सकेंगी। माता पिता व सास ससुर की सेवा करने से हमारे हाथ मजबूत और मन शिवसंकल्प वाला बन जाता है जिससे हम हर परिस्थितियों में हम समान बनी रहती हैं। भावुक होकर अपने बारे में कहा कि अनपढ़ माता होने के बावजूद आज प्रोफेसर हूँ और भाई बहन भी शिक्षित व सेवारत हैं।उन्होंने इन सब कार्यों में सहयोग के लिए अपने पतिदेव के प्रति भी आभार प्रकट किया। बताया कि प्रारम्भ से ही धार्मिक कार्यों में रुचि होने व माता पिता व सास ससुर की सेवा से आज वे दृढ़तापूर्वक शिक्षण कार्य कर रही है।

इस अवसर पर गुरुकुल सुल्तानपुर के आचार्य शुचिषद मुनि ने महिलाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि बेटियों को लोग पराया धन कहते हैं जबकि बेटियां राष्ट्रधन होती हैं इनके निर्माण किये सन्तान देश को आदर्श बनाते हैं। माता व्यक्ति की प्रथम शिक्षक होती है वह एक लाख अध्यापकों के बराबर होती है। उसके निर्माण किये सन्तान बिगड़ नहीं सकते और उसके बिगाड़े सन्तान को दुनिया का कोई शिक्षक बना नहीं सकता। इसलिए माता को निर्माता कहा गया है। इस अवसर पर मधुप नारायण शुक्ल ने अपने विचार रखते हुए देश की वर्तमान परिस्थिति में महिलाओं को अपनी सुरक्षा स्वयं करने की बात कही और मुख्य अतिथि व आमंत्रित अतिथियों को वैदिक साहित्य भेंटकर स्वाध्याय का अनुरोध किया।
कार्यक्रम में राधा देवी, रामरती, सुनीता देवी, श्रद्धा देवी, शक्ति, अंशिका, आयुषी, शिवांगी, प्रियंका गुप्ता, पुष्पा, कंचन लता आर्य, रजनी आर्य, रश्मि आर्य, माया देवी, दुर्गा शालिनी, सहित अनेक महिलाएं सम्मिलित रही।

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